
नई दिल्ली / चेन्नई, थलपति विजय की बहुप्रतीक्षित तमिल फिल्म ‘Jana Nayagan’ को लेकर जारी सर्टिफिकेशन विवाद में आज मद्रास हाई कोर्ट ने एक बड़ा और निर्णायक फैसला सुनाया है, जिससे फिल्म के रिलीज़ के रास्ते पर से कानूनी अड़चनें हटा दी गईं। अदालत ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) को निर्देश दिया है कि वह फिल्म को U/A (UA 16+) सर्टिफिकेट तुरंत जारी करे, जिससे इसके थिएटर में रिलीज़ की संभावना बढ़ गई है। हालांकि मामला अभी पूरी तरह शांत नहीं हुआ, क्योंकि CBFC ने फैसले के खिलाफ आकर्षण (appeal) की बात कही है।
‘Jana Nayagan’ विवाद — कैसे शुरू हुआ मामला
‘Jana Nayagan’ को लेकर सेंसर सर्टिफिकेट विवाद कुछ दिन पहले तब शुरू हुआ जब फिल्म सीबीएफसी में समय से सर्टिफिकेशन नहीं मिलने के कारण 9 जनवरी 2026 को होने वाली मूल रिलीज़ टल गई थी। मेकर्स ने अक्टूबर 2025 में सर्टिफिकेशन के लिए फिल्म बोर्ड को भेजी थी, और एक्ज़ामिनिंग कमेटी ने U/A 16+ सर्टिफिकेशन के लिए शर्तों के साथ मंज़ूरी दे दी थी। इसके बाद मेकर्स द्वारा आवश्यक कट्स भी कर दिए गए थे।
लेकिन CBFC के एक सदस्य के आपत्ति जताने पर अध्यक्ष ने फिल्म को रिवाइजिंग कमेटी के पास भेज दिया, जिससे पुर्ननिरीक्षण की प्रक्रिया शुरू हो गई और फिल्म की रिलीज़ में देरी होने लगी। इस पूरे फैसले को निर्माताओं ने हाई कोर्ट में चुनौती दी और याचिका दायर की कि सर्टिफिकेट जारी न होने से उन्हें वित्तीय और व्यावसायिक नुकसान हो रहा है।
मद्रास हाईकोर्ट का आदेश
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति पी.टी. आशा ने देखा कि CBFC की रिवाइज़िंग कमेटी भेजने वाली कार्रवाई तब की गई जब बोर्ड पहले ही ‘UA 16+’ सर्टिफिकेट देने के लिए एक्ज़ामिनिंग कमेटी की अनुशंसा स्वीकार कर चुका था, और वो अनुशंसा बोर्ड द्वारा 22 दिसंबर 2025 को आधिकारिक रूप से communicated भी की जा चुकी थी। ऐसे में अध्यक्ष का रिव्यु कमेटी भेजना बिना अनुचित आधार के जारी किया गया।
कोर्ट ने कहा कि एक बार जब फिल्म को कट्स/संशोधनों के बाद U/A सर्टिफिकेट के लिए मंज़ूरी दी जाती है, तो CBFC अध्यक्ष के पास फिर से उसे Review Committee भेजने का अधिकार नहीं रहता। इस आधार पर कोर्ट ने पहले किए गए निर्णय को रद्द कर दिया और आदेश दिया कि सीबीएफसी तत्काल U/A 16+ सर्टिफिकेट जारी करे.
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि CBFC का बाद में बैठकर पुन: निर्णय लेना “एक खतरनाक प्रवृत्ति” का उदाहरण होगा और यह बोर्ड की निर्णय प्रक्रिया की पवित्रता (sanctity) को कमजोर करेगा।
U/A सर्टिफिकेट का मतलब
U/A (“Unrestricted with Caution”) सर्टिफिकेट का मतलब है कि फिल्म सभी आयु समूहों के लोगों के लिए खुली है लेकिन 16 साल से कम उम्र के बच्चों को माता-पिता या अभिभावक के निर्देशन में देखने की सलाह दी जाती है। यह आमतौर पर हल्की-मध्यम एक्शन, भावनात्मक दृश्यों या संदेश-आधारित फिल्मों को दिया जाता है।
फिल्म की रिलीज़ पर असर
फिल्म 9 जनवरी 2026 को रिलीज़ होने वाली थी, लेकिन सर्टिफिकेट विवाद के कारण उसकी रिलीज़ स्थगित कर दी गई थी। अदालत के आदेश मिलने के साथ फिल्म को U/A 16+ प्रमाणपत्र जारी करने का निर्देश मिल गया है, लेकिन अभी तक आधिकारिक रिलीज़ तिथि की पुष्टि नहीं की गई है। CBFC ने कहा है कि वह हाई कोर्ट के फैसले के खिलाफ अपील करेगा, जिससे अंतिम मंज़ूरी में कुछ समय लग सकता है।
फिल्म क्यों विवाद में आई?
CBFC की रिव्यू प्रक्रिया के दौरान आपत्ति उठाई गई थी कि फिल्म में कुछ दृश्यों में युद्ध, हिंसा या रक्षा बलों/सैनिकों का भड़काऊ चित्रण हो सकता है या कुछ धार्मिक/सामाजिक संवेदनशील विषयों को गलत ढंग से पेश किया गया है। हालांकि एक्ज़ामिनिंग कमेटी ने इन सभी पहलुओं को कट्स/संशोधनों के बाद संतोषजनक माना था, पर फिर भी अध्यक्ष के कदम ने मामला कोर्ट तक पहुंचा दिया।
CBFC का पक्ष और अपील
CBFC ने कोर्ट के फैसले के खिलाफ आकर्षण (appeal) दायर करने की बात कही है। बोर्ड के वकील ने तर्क दिया कि अध्यक्ष के पास यह अधिकार था कि वह रिव्यु समिति को मामला भेजे क्योंकि ratings प्रक्रिया में कुछ सदस्य ने शिकायत दर्ज कराई थी। उनका कहना है कि रिव्यू करने से संभावित विवादों से बचा जा सकता है और फिल्म उद्योग में समान व्यवहार सुनिश्चित हो सकता है।
कोर्ट की सुनवाई में यह भी पूछा गया कि एक सदस्य की शिकायत को आधार बनाकर धन्यवाद नियमों के अनुसार निर्णय क्यों लिया गया, और क्या यह नि:संदेह रूप से बोर्ड के अधिकार क्षेत्र में आता है। इन सब बहसों के बीच फिल्म के पक्ष ने स्पष्ट किया कि सभी आवश्यक कट्स/संशोधन समय से पहले किए गए थे और समीक्षा समिति की अनुशंसा के बाद आधिकारिक मंज़ूरी होनी चाहिए थी।
फिल्म की पृष्ठभूमि
‘Jana Nayagan’ विजय के प्रोडक्शन और अभिनय में बनी तमिल फिल्म है जिसे H Vinoth ने निर्देशित किया है। इसमें प्रमुख कलाकारों में विजय, पूजा हेगड़े, Mamitha Baiju, प्रकाश राज और बॉबी दीओल शामिल हैं। यह फिल्म विजय की फिल्मी करियर की एक महत्वपूर्ण प्रस्तुति मानी जा रही है, खासकर इसकी कहानी, संदेश और गंभीर विषयों के लिए।
फिल्म को पोंगल (Pongal) के दौरान रिलीज़ करने की योजना थी, जो तमिल सिनेमा में प्रमुख त्योहार रिलीज़ विंडो माना जाता है, लेकिन सर्टिफिकेशन विवाद के कारण रिलीज़ को पुनर्निर्धारित करना पड़ा।
प्रत्युत्तर और फैंस की प्रतिक्रिया
फैंस ने सोशल मीडिया पर हाई कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है, जबकि कुछ ने CBFC के फैसले और प्रक्रिया पर आलोचनाएँ की हैं। अभिनेता विजय के समर्थकों ने कहा है कि फिल्म को समय पर रिलीज़ होना चाहिए और कारणहीन देरी से बॉक्स ऑफिस और दर्शकों को नुकसान हो सकता है।
कुछ सिनेमाघर अधिकारियों और टिकट बुकिंग प्लेटफॉर्म्स ने पहले ही रिफंड प्रोसेस शुरू कर दी थी, क्योंकि 9 जनवरी स्पॉट शोज़ रद्द कर दी गई थीं। इससे स्पष्ट है कि उद्योग पर भी वित्तीय दबाव पड़ा है।
मद्रास हाई कोर्ट का यह निर्णय ‘Jana Nayagan’ के रिलीज़ पर से बड़ी कानूनी अड़चन को दूर करने वाला है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि एक बार U/A 16+ सर्टिफिकेट स्वीकृत होने के बाद उसे पुनर्जीवित करने या Review Committee भेजने का अधिकार सीबीएफसी अध्यक्ष को नहीं है और पुर्नसमीक्षा रखने वाली आपत्ति गलत है। इस फैसले से फिल्म को UA सर्टिफिकेट मिल गया है और अब यह थिएटर रिलीज़ के रास्ते पर आगे बढ़ सकती है, हालांकि आख़िरकार रिलीज़ तिथि और सीबीएफसी की अपील चीज़ें अभी भी निर्णय के इंतज़ार में हैं।








