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भारत-नेपाल अग्रवाल महासम्मेलन 1 एवं 2 अगस्त को काठमांडू में, समाज सुधार और जागरण पर होगा मंथन

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काठमांडू। अखिल भारतीय अग्रवाल महासभा के तत्वावधान में भारत और नेपाल के अग्रवाल समाज के प्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों, समाजसेवियों, उद्यमियों एवं विभिन्न संगठनों के पदाधिकारियों का भव्य मिलन समारोह आगामी 1 एवं 2 अगस्त को काठमांडू में आयोजित किया जाएगा। इस अंतरराष्ट्रीय सामाजिक सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य भारत और नेपाल के अग्रवाल समाज के बीच आपसी संबंधों को सुदृढ़ बनाना, सामाजिक जागरूकता को बढ़ावा देना तथा समाज सुधार से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर व्यापक विचार-विमर्श करना है।

आयोजन समिति के अनुसार यह कार्यक्रम पूर्णतः सामाजिक एवं सांस्कृतिक उद्देश्य से आयोजित किया जा रहा है तथा इसका किसी भी प्रकार की राजनीतिक गतिविधि से कोई संबंध नहीं है। सम्मेलन का प्रमुख विषय “समाज सुधार एवं अग्रवाल परिवार में जागरण अभियान” रखा गया है, जिसके अंतर्गत वर्तमान समय की सामाजिक चुनौतियों और उनके समाधान पर गंभीर चर्चा की जाएगी।

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सम्मेलन में विशेष रूप से बच्चों की प्रारंभिक शिक्षा को भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों से जोड़ने के उद्देश्य से गुरुकुल आधारित शिक्षा प्रणाली पर विचार किया जाएगा। समाज के प्रबुद्धजनों का मानना है कि आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों का विकास भी आवश्यक है, जिससे नई पीढ़ी अपने संस्कारों और परंपराओं से जुड़ी रहे।

सम्मेलन में समय पर विवाह को प्रोत्साहित करने, सादगीपूर्ण विवाह की परंपरा को बढ़ावा देने तथा विवाह समारोहों में अनावश्यक खर्च को कम करने जैसे विषयों पर भी विस्तार से चर्चा होगी। समाज के वरिष्ठजन और विशेषज्ञ इस बात पर विचार रखेंगे कि किस प्रकार वैदिक परंपराओं के अनुरूप दिन में विवाह संस्कार और सरल रीति-रिवाजों के माध्यम से सामाजिक जीवन को अधिक संतुलित एवं व्यावहारिक बनाया जा सकता है।

आयोजन का एक महत्वपूर्ण विषय युवाओं को अपने पारिवारिक और पैतृक व्यवसायों की ओर आकर्षित करना भी होगा। वर्तमान समय में बदलती आर्थिक परिस्थितियों और आधुनिक तकनीकों के बीच पारंपरिक व्यापारों को नए स्वरूप में विकसित करने तथा उन्हें प्रतिस्पर्धात्मक बनाने पर भी चर्चा की जाएगी। समाज के सफल उद्यमी युवाओं को व्यापार और उद्यमिता के क्षेत्र में मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।

कार्यक्रम की शुरुआत 1 अगस्त को अतिथियों के स्वागत के साथ होगी। भारत और नेपाल के विभिन्न राज्यों एवं शहरों से आने वाले अग्रवाल समाज के प्रतिनिधियों का पारंपरिक स्वागत किया जाएगा। उसी दिन शाम 4 बजे से 7 बजे तक परिचय सम्मेलन आयोजित होगा, जिसमें दोनों देशों से आए परिवारों को एक-दूसरे से परिचित होने का अवसर मिलेगा। यह सत्र सामाजिक समरसता और पारिवारिक संबंधों को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

पहले दिन रात्रि 8 बजे सामूहिक रात्रिभोज का आयोजन किया जाएगा, जिसमें सभी अतिथि एक साथ सहभागिता करेंगे। आयोजन समिति का मानना है कि ऐसे कार्यक्रम आपसी संवाद और सामाजिक एकता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

दूसरे दिन 2 अगस्त को प्रातः 7 बजे से 9 बजे तक नाश्ते के पश्चात सुबह 9 बजे से दोपहर 12 बजे तक विचार गोष्ठी आयोजित होगी। इस सत्र में समाज के वरिष्ठ पदाधिकारी, बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, उद्योगपति एवं विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। साथ ही समाज के विकास, संगठन की मजबूती और नई पीढ़ी को सही दिशा देने के लिए आवश्यक सुझावों पर भी चर्चा की जाएगी।

दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक सामूहिक भोजन के पश्चात सभी प्रतिभागी भगवान पशुपतिनाथ मंदिर के दर्शन के लिए प्रस्थान करेंगे। नेपाल की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान माने जाने वाले पशुपतिनाथ धाम में दर्शन-पूजन के साथ आध्यात्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त काठमांडू के प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण भी प्रस्तावित है।

रात्रि 8 बजे से 10 बजे तक आयोजित सामूहिक रात्रिभोज के साथ सम्मेलन का समापन होगा। इस अवसर पर दोनों देशों के अग्रवाल समाज के प्रतिनिधि भविष्य में भी सामाजिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक सहयोग को बढ़ाने का संकल्प लेंगे।

आयोजन समिति का कहना है कि भारत और नेपाल के अग्रवाल समाज के बीच वर्षों से आत्मीय संबंध रहे हैं। यह सम्मेलन उन संबंधों को और अधिक मजबूत बनाने के साथ-साथ समाज के समग्र विकास की दिशा में नई पहल का माध्यम बनेगा। सम्मेलन के माध्यम से समाज के सामने उपस्थित चुनौतियों पर विचार-विमर्श कर उनके समाधान के लिए सामूहिक प्रयासों की रूपरेखा भी तैयार की जाएगी।

समाज के वरिष्ठ पदाधिकारियों ने भारत और नेपाल के सभी अग्रवाल परिवारों से इस ऐतिहासिक सम्मेलन में सहभागिता करने की अपील की है। उनका मानना है कि सामाजिक एकता, सांस्कृतिक संरक्षण और पारिवारिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाने के लिए ऐसे आयोजन समय की आवश्यकता हैं। सम्मेलन न केवल दोनों देशों के अग्रवाल समाज को एक मंच पर लाएगा, बल्कि भावी पीढ़ियों के लिए भी नई दिशा और प्रेरणा प्रदान करेगा।

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